भरत सरिस को राम सनेही
भरत सरिस को राम सनेही
चौपाई ४, दोहा २१८ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
भरत सरिस को राम सनेही। जगु जप राम रामु जप जेही॥ ४ ॥
अर्थ
सारा जगत् श्रीराम को जपता है, वे श्रीरामजी जिनको जपते हैं उन भरतजी के समान श्रीरामचन्द्रजी का प्रेमी कौन होगा ?।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “इन्द्र-बृहस्पति संवाद” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २१८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में इन्द्र की चिंता पर बृहस्पति द्वारा भरत-भक्ति की महिमा और राम-स्वभाव का उपदेश का वर्णन है।
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इन्द्र-बृहस्पति संवाद