लखि सिय सहित सरल दोउ भाई
लखि सिय सहित सरल दोउ भाई
चौपाई ३, दोहा २५२ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
लखि सिय सहित सरल दोउ भाई। कुटिल रानि पछितानि अघाई॥ अवनि जमहि जाचति कैकेई। महि न बीचु बिधि मीचु न देई॥ ३ ॥
अर्थ
सीताजी समेत दोनों भाइयों (श्रीराम-लक्ष्मण) को सरल स्वभाव देखकर कुटिल रानी कैकेयी भरपेट पछतायी। वह पृथ्वी तथा यमराज से याचना करती है, किन्तु धरती बीच (फटकर समा जाने के लिये रास्ता) नहीं देती और विधाता मृत्यु नहीं देता।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “वनवासियों द्वारा सत्कार, कैकेयी का पश्चाताप” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २५२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में वनवासियों द्वारा भरतजी की मंडली के सत्कार और कैकेयी के गहन पश्चाताप का वर्णन है।
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वनवासियों द्वारा सत्कार, कैकेयी का पश्चाताप