लखी नरेस बात फुरि साँची
लखी नरेस बात फुरि साँची
चौपाई ३, दोहा ३४ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
लखी नरेस बात फुरि साँची। तिय मिस मीचु सीस पर नाची॥ गहि पद बिनय कीन्ह बैठारी। जनि दिनकर कुल होसि कुठारी॥ ३ ॥
अर्थ
राजा ने समझ लिया कि बात सचमुच सच्ची है, स्त्री के बहाने मेरी मृत्यु ही सिर पर नाच रही है। [तदनन्तर राजाने कैकेयी के] चरण पकड़कर उसे बिठाकर विनती की कि तू सूर्यकुल [रूपी वृक्ष] के लिये कुल्हाड़ी मत बन।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ-कैकेयी संवाद, सुमंत्र का राम को बुलाना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में दशरथ-कैकेयी संवाद, दो वरों की माँग और सुमंत्र द्वारा श्रीराम को महल में बुलाने का वर्णन है।
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दशरथ-कैकेयी संवाद, सुमंत्र का राम को बुलाना