लखन सचिवँ सियँ किए प्रनामा

चौपाई २, दोहा ८७ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

लखन सचिवँ सियँ किए प्रनामा। सबहि सहित सुखु पायउ रामा॥ गंग सकल मुद मंगल मूला। सब सुख करनि हरनि सब सूला॥ २ ॥

अर्थ

लक्ष्मणजी, सुमन्त्र और सीताजी ने भी प्रणाम किया। सबके साथ श्रीरामचन्द्रजी ने सुख पाया। गंगा जी समस्त आनन्द-मंगलों की मूल हैं। वे सब सुखों की करनेवाली और सब पीड़ाओं की हरनेवाली हैं।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “शृंगवेरपुर में निषादराज द्वारा सेवा” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ८७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शृंगवेरपुर में निषादराज गुह द्वारा श्रीराम की प्रेमपूर्ण सेवा और भक्तिपूर्ण स्वागत का वर्णन है।

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शृंगवेरपुर में निषादराज द्वारा सेवा