कहि कहि कोटिक कथा प्रसंगा

चौपाई ३, दोहा ८७ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

कहि कहि कोटिक कथा प्रसंगा। रामु बिलोकहिं गंग तरंगा॥ सचिवहि अनुजहि प्रियहि सुनाई। बिबुध नदी महिमा अधिकाई॥ ३ ॥

अर्थ

अनेक कथा-प्रसंग कहते हुए श्रीरामजी गंगा जी की तरंगों को देख रहे हैं। उन्होंने मन्त्री को, छोटे भाई लक्ष्मणजी को और प्रिया सीताजी को देवनदी गंगा जी की बड़ी महिमा सुनायी।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “शृंगवेरपुर में निषादराज द्वारा सेवा” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ८७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शृंगवेरपुर में निषादराज गुह द्वारा श्रीराम की प्रेमपूर्ण सेवा और भक्तिपूर्ण स्वागत का वर्णन है।

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शृंगवेरपुर में निषादराज द्वारा सेवा