लगे जनक मुनिजन पद बंदन
लगे जनक मुनिजन पद बंदन
चौपाई ४, दोहा २७५ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
लगे जनक मुनिजन पद बंदन। रिषिन्ह प्रनामु कीन्ह रघुनंदन॥ भाइन्ह सहित रामु मिलि राजहि। चले लवाइ समेत समाजहि॥ ४ ॥
अर्थ
जनकजी मुनिजनों के चरणों की वन्दना करने लगे और रघुनंदन श्रीरामजी ने ऋषियों को प्रणाम किया। फिर भाइयों सहित श्रीरामजी राजा जनकजी से मिलकर उन्हें समाज सहित ले चले।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “जनकजी का चित्रकूट आगमन, सबका मिलन” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २७५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राजा जनक का चित्रकूट आगमन और कोल-किरात सहित सभी का प्रेमपूर्ण मिलन का वर्णन है।
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जनकजी का चित्रकूट आगमन, सबका मिलन