आवत जनकु चले एहि भाँती

चौपाई ३, दोहा २७५ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

आवत जनकु चले एहि भाँती। सहित समाज प्रेम मति माती॥ आए निकट देखि अनुरागे। सादर मिलन परसपर लागे॥ ३ ॥

अर्थ

जनकजी इस प्रकार चले आ रहे हैं। समाज सहित उनकी बुद्धि प्रेम में मतवाली हो रही है। निकट आये देखकर सब प्रेम में भर गये और आदरपूर्वक आपस में मिलने लगे।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “जनकजी का चित्रकूट आगमन, सबका मिलन” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २७५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राजा जनक का चित्रकूट आगमन और कोल-किरात सहित सभी का प्रेमपूर्ण मिलन का वर्णन है।

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जनकजी का चित्रकूट आगमन, सबका मिलन