कृपासिंधु सनमानि सुबानी
कृपासिंधु सनमानि सुबानी
चौपाई ४, दोहा ३०१ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
कृपासिंधु सनमानि सुबानी। बैठाए समीप गहि पानी॥ भरत बिनय सुनि देखि सुभाऊ। सिथिल सनेहँ सभा रघुराऊ॥ ४ ॥
अर्थ
कृपासिन्धु श्रीरामचन्द्रजी ने सुन्दर वाणी से भरतजी का सम्मान करके हाथ पकड़कर उनको अपने पास बिठा लिया। भरतजी की विनती सुनकर और उनका स्वभाव देखकर सारी सभा और श्रीरघुराऊ स्नेह से शिथिल हो गये।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-भरत संवाद” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३०१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा भरत को पितृ आज्ञा, राजधर्म और समर्पण का उपदेश का वर्णन है।
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श्रीराम-भरत संवाद