देखि दुखारी दीन दुहु समाज नर

सोरठा ३०१ · अयोध्याकाण्ड

सोरठा पाठ

देखि दुखारी दीन दुहु समाज नर नारि सब। मघवा महा मलीन मुए मारि मंगल चहत॥ ३०१ ॥

अर्थ

दोनों समाजों के सभी नर-नारियों को दीन और दुखी देखकर महामलिन-मन इन्द्र मरे हुओं को मारकर अपना मंगल चाहता है।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-भरत संवाद” प्रकरण का सोरठा ३०१ है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा भरत को पितृ आज्ञा, राजधर्म और समर्पण का उपदेश का वर्णन है।

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श्रीराम-भरत संवाद