कृपासिंधु बोले मुसुकाई
कृपासिंधु बोले मुसुकाई
चौपाई १, दोहा १०१ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
कृपासिंधु बोले मुसुकाई। सोइ करु जेहिं तव नाव न जाई॥ बेगि आनु जल पाय पखारू। होत बिलंबु उतारहि पारू॥ १ ॥
अर्थ
कृपासिंधु श्रीरामचन्द्रजी केवट से मुसकराकर बोले-भाई ! तू वही कर जिससे तेरी नाव न जाय। जल्दी पानी ला और पैर धो ले। देर हो रही है, पार उतार दे।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “केवट का प्रेम और गंगा पार” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १०१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में केवट द्वारा प्रभु के चरण पखारने और श्रीराम-सीता-लक्ष्मण को गंगा पार उतारने का वर्णन है।
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केवट का प्रेम और गंगा पार