सुनि केवट के बैन प्रेम लपेटे

सोरठा १०० · अयोध्याकाण्ड

सोरठा पाठ

सुनि केवट के बैन प्रेम लपेटे अटपटे। बिहसे करुनाऐन चितइ जानकी लखन तन॥ १०० ॥

अर्थ

केवट के प्रेम में लपेटे हुए अटपटे वचन सुनकर करुणाऐन श्रीरामचन्द्रजी जानकीजी और लक्ष्मणजी की ओर देखकर हँसे।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “केवट का प्रेम और गंगा पार” प्रकरण का सोरठा १०० है। इस प्रकरण में केवट द्वारा प्रभु के चरण पखारने और श्रीराम-सीता-लक्ष्मण को गंगा पार उतारने का वर्णन है।

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केवट का प्रेम और गंगा पार