जासु नाम सुमिरत एक बारा
जासु नाम सुमिरत एक बारा
चौपाई २, दोहा १०१ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
जासु नाम सुमिरत एक बारा। उतरहिं नर भवसिंधु अपारा॥ सोइ कृपालु केवटहि निहोरा। जेहिं जगु किय तिहु पगहु ते थोरा॥ २ ॥
अर्थ
एक बार जिनका नाम स्मरण करते ही मनुष्य अपार भवसागर के पार उतर जाते हैं, और जिन्होंने [वामनावतार में] जगत् को तीन पग से भी छोटा कर दिया था (दो ही पग में त्रिलोकी को नाप लिया था), वही कृपालु श्रीरामचन्द्रजी [केवट से पार उतारने के लिये] केवट का निहोरा कर रहे हैं !।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “केवट का प्रेम और गंगा पार” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १०१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में केवट द्वारा प्रभु के चरण पखारने और श्रीराम-सीता-लक्ष्मण को गंगा पार उतारने का वर्णन है।
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केवट का प्रेम और गंगा पार