कृपा अनुग्रहु अंगु अघाई
कृपा अनुग्रहु अंगु अघाई
चौपाई ३, दोहा ३०० के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
कृपा अनुग्रहु अंगु अघाई। कीन्हि कृपानिधि सब अधिकाई॥ राखा मोर दुलार गोसाईं। अपनें सील सुभायँ भलाईं॥ ३ ॥
अर्थ
कृपानिधान ने मुझ पर पर्याप्त कृपा और अनुग्रह, सब अधिक ही किये हैं (अर्थात् मैं जिसके जरा भी लायक नहीं था उतनी अधिक सर्वांशपूर्ण कृपा आपने मुझ पर की है)। हे गोसाईं! आपने अपने शील, स्वभाव और भलाई से मेरा दुलार रखा।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-भरत संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३०० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा भरत को पितृ आज्ञा, राजधर्म और समर्पण का उपदेश का वर्णन है।
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श्रीराम-भरत संवाद