देखेउँ पाय सुमंगल मूला
देखेउँ पाय सुमंगल मूला
चौपाई २, दोहा ३०० के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
देखेउँ पाय सुमंगल मूला। जानेउँ स्वामि सहज अनुकूला॥ बड़ें समाज बिलोकेउँ भागू। बड़ीं चूक साहिब अनुरागू॥ २ ॥
अर्थ
मैंने सुन्दर मंगलों के मूल आपके चरणों का दर्शन किया, और यह जान लिया कि स्वामी मुझ पर स्वभाव से ही अनुकूल हैं। इस बड़े समाज में अपने भाग्य को देखा कि इतनी बड़ी चूक होने पर भी स्वामी का मुझ पर कितना अनुराग है!।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-भरत संवाद” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३०० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा भरत को पितृ आज्ञा, राजधर्म और समर्पण का उपदेश का वर्णन है।
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श्रीराम-भरत संवाद