कोसलपति गति सुनि जनकौरा
कोसलपति गति सुनि जनकौरा
चौपाई १, दोहा २७१ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
कोसलपति गति सुनि जनकौरा। भे सब लोक सोकबस बौरा॥ जेहिं देखे तेहि समय बिदेहू। नामु सत्य अस लाग न केहू॥ १ ॥
अर्थ
अयोध्यानाथ की गति (दशरथजी का मरण) सुनकर जनकपुरवासी सभी लोग शोकवश बावले हो गये (सुध-बुध भूल गये)। उस समय जिसने भी विदेह को [शोकमग्न] देखा, उसे ऐसा न लगा कि उनका विदेह नाम सत्य है! [क्योंकि देहाभिमान से शून्य पुरुष को शोक कैसा?]
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-भरतादि का संवाद” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २७१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सभा में श्रीराम और भरत के बीच धर्म, राज्य और पितृ आज्ञा विषयक गंभीर संवाद का वर्णन है।
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श्रीराम-भरतादि का संवाद