नाहिं त कोसलनाथ कें साथ कुसल

दोहा २७० · अयोध्याकाण्ड

दोहा पाठ

नाहिं त कोसलनाथ कें साथ कुसल गइ नाथ। मिथिला अवध बिसेष तें जगु सब भयउ अनाथ॥ २७० ॥

अर्थ

नहीं तो, हे नाथ! कोसलनाथ के साथ ही कुशल भी चली गयी। [उनके चले जाने से] यों तो सारा जगत् ही अनाथ हो गया, किन्तु मिथिला और अवध तो विशेष रूप से अनाथ हो गये।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-भरतादि का संवाद” प्रकरण का दोहा २७० है। इस प्रकरण में सभा में श्रीराम और भरत के बीच धर्म, राज्य और पितृ आज्ञा विषयक गंभीर संवाद का वर्णन है।

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श्रीराम-भरतादि का संवाद