कोप समाजु साजि सबु सोई

चौपाई ४, दोहा २३ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

कोप समाजु साजि सबु सोई। राजु करत निज कुमति बिगोई॥ राउर नगर कोलाहलु होई। यह कुचालि कछु जान न कोई॥ ४ ॥

अर्थ

कैकेयी कोप का सब साज सजकर [कोपभवन में] जा सोयी। राज्य करती हुई वह अपनी दुष्ट बुद्धि से नष्ट हो गयी। राजमहल और नगर में धूम-धाम मच रही है। इस कुचाल को कोई कुछ नहीं जानता।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “कैकेयी का कोपभवन में जाना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मंथरा के दुष्प्रभाव से कुबुद्धि कैकेयी के कोपभवन में जाने और अयोध्या के उत्सव पर संकट की छाया पड़ने का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
कैकेयी का कोपभवन में जाना