बिपति बीजु बरषा रितु चेरी
बिपति बीजु बरषा रितु चेरी
चौपाई ३, दोहा २३ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
बिपति बीजु बरषा रितु चेरी। भुइँ भइ कुमति कैकई केरी॥ पाइ कपट जलु अंकुर जामा। बर दोउ दल दुख फल परिनामा॥ ३ ॥
अर्थ
विपत्ति बीज है, वर्षा ऋतु दासी है, कैकेयी की कुबुद्धि भूमि हो गयी। उसमें कपट रूपी जल पाकर अंकुर फूट निकला। दोनों वरदान उस अंकुर के दो पत्ते हैं और अंत में इसका दुःख रूप फल होगा।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “कैकेयी का कोपभवन में जाना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मंथरा के दुष्प्रभाव से कुबुद्धि कैकेयी के कोपभवन में जाने और अयोध्या के उत्सव पर संकट की छाया पड़ने का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
कैकेयी का कोपभवन में जाना