को कहि सकइ प्रयाग प्रभाऊ

चौपाई १, दोहा १०६ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

को कहि सकइ प्रयाग प्रभाऊ। कलुष पुंज कुंजर मृगराऊ॥ अस तीरथपति देखि सुहावा। सुख सागर रघुबर सुखु पावा॥ १ ॥

अर्थ

पापों के समूहरूपी हाथी को मारने के लिये सिंहरूप प्रयागराज का प्रभाव कौन कह सकता है। ऐसे सुहावने तीर्थराज का दर्शन कर सुख-सागर श्रीरघुवर ने भी सुख पाया।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “प्रयाग में भरद्वाज से भेंट” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १०६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में प्रयाग में भरद्वाज मुनि से श्रीराम की भेंट और यमुनातट निवासियों के प्रेम का वर्णन है।

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प्रयाग में भरद्वाज से भेंट