सेवहिं सुकृती साधु सुचि पावहिं सब
सेवहिं सुकृती साधु सुचि पावहिं सब
दोहा १०५ · अयोध्याकाण्ड
दोहा पाठ
सेवहिं सुकृती साधु सुचि पावहिं सब मनकाम। बंदी बेद पुरान गन कहहिं बिमल गुन ग्राम॥ १०५ ॥
अर्थ
पुण्यात्मा, पवित्र साधु उसकी सेवा करते हैं और सब मनकामना पाते हैं। वेद और पुराणों के गण भाट हैं, जो उसके निर्मल गुण-ग्राम का बखान करते हैं।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “प्रयाग में भरद्वाज से भेंट” प्रकरण का दोहा १०५ है। इस प्रकरण में प्रयाग में भरद्वाज मुनि से श्रीराम की भेंट और यमुनातट निवासियों के प्रेम का वर्णन है।
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प्रयाग में भरद्वाज से भेंट