कहि सिय लखनहि सखहि सुनाई
कहि सिय लखनहि सखहि सुनाई
चौपाई २, दोहा १०६ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
कहि सिय लखनहि सखहि सुनाई। श्रीमुख तीरथराज बड़ाई॥ करि प्रनामु देखत बन बागा। कहत महातम अति अनुरागा॥ २ ॥
अर्थ
उन्होंने अपने श्रीमुख से सीताजी, लक्ष्मणजी और सखा गुह को तीर्थराज की महिमा कहकर सुनायी। तदनन्तर प्रणाम करके, वन और बगीचों को देखते हुए और बड़े प्रेम से माहात्म्य कहते हुए--।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “प्रयाग में भरद्वाज से भेंट” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १०६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में प्रयाग में भरद्वाज मुनि से श्रीराम की भेंट और यमुनातट निवासियों के प्रेम का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
प्रयाग में भरद्वाज से भेंट