कीन्हि मातु मिस काल कुचाली
कीन्हि मातु मिस काल कुचाली
चौपाई १, दोहा २५३ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
कीन्हि मातु मिस काल कुचाली। ईति भीति जस पाकत साली॥ केहि बिधि होइ राम अभिषेकू। मोहि अवकलत उपाउ न एकू॥ १ ॥
अर्थ
माता के मिस से काल ने कुचाल की है। जैसे धान के पकते समय ईति की भाँति भय आ उपस्थित हो। अब श्रीरामचन्द्रजी का राज्याभिषेक किस प्रकार हो, मुझे तो एक भी उपाय नहीं सूझ पड़ता।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “वनवासियों द्वारा सत्कार, कैकेयी का पश्चाताप” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २५३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में वनवासियों द्वारा भरतजी की मंडली के सत्कार और कैकेयी के गहन पश्चाताप का वर्णन है।
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वनवासियों द्वारा सत्कार, कैकेयी का पश्चाताप