अवसि फिरहिं गुर आयसु मानी

चौपाई २, दोहा २५३ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

अवसि फिरहिं गुर आयसु मानी। मुनि पुनि कहब राम रुचि जानी॥ मातु कहेहुँ बहुरहिं रघुराऊ। राम जननि हठ करबि कि काऊ॥ २ ॥

अर्थ

गुरुजी की आज्ञा मानकर तो श्रीरामजी अवश्य ही अयोध्या को लौट चलेंगे। परन्तु मुनि पुनः राम की रुचि जानकर ही कहेंगे। माता के कहने से भी श्रीरघुराज लौट सकते हैं; पर भला, राम की जननी क्या कभी हठ करेगी?

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “वनवासियों द्वारा सत्कार, कैकेयी का पश्चाताप” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २५३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में वनवासियों द्वारा भरतजी की मंडली के सत्कार और कैकेयी के गहन पश्चाताप का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
वनवासियों द्वारा सत्कार, कैकेयी का पश्चाताप