कीन्ह सप्रेम प्रनामु बहोरी
कीन्ह सप्रेम प्रनामु बहोरी
चौपाई ३, दोहा ३०७ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
कीन्ह सप्रेम प्रनामु बहोरी। बोले पानि पंकरुह जोरी॥ नाथ भयउ सुखु साथ गए को। लहेउँ लाहु जग जनमु भए को॥ ३ ॥
अर्थ
उन्होंने फिर प्रेमपूर्वक प्रणाम किया और करकमलों को जोड़कर वे बोले--हे नाथ! मुझे आपके साथ जाने का सुख प्राप्त हो गया और मैंने जगत् में जन्म लेने का लाभ भी पा लिया।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-भरत संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३०७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा भरत को पितृ आज्ञा, राजधर्म और समर्पण का उपदेश का वर्णन है।
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श्रीराम-भरत संवाद