अब कृपाल जस आयसु होई

चौपाई ४, दोहा ३०७ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

अब कृपाल जस आयसु होई। करौं सीस धरि सादर सोई॥ सो अवलंब देव मोहि देई। अवधि पारु पावौं जेहि सेई॥ ४ ॥

अर्थ

हे कृपालु! अब जैसी आज्ञा हो, उसी को मैं सिर पर धरकर आदरपूर्वक करूँ! परन्तु देव! आप मुझे वह अवलम्बन (कोई सहारा) दें जिसकी सेवा कर मैं अवधि का पार पा जाऊँ।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-भरत संवाद” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३०७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा भरत को पितृ आज्ञा, राजधर्म और समर्पण का उपदेश का वर्णन है।

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श्रीराम-भरत संवाद