करि कुरूप बिधि परबस कीन्हा

चौपाई ३, दोहा १६ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

करि कुरूप बिधि परबस कीन्हा। बवा सो लुनिअ लहिअ जो दीन्हा॥ कोउ नृप होउ हमहि का हानी। चेरि छाड़ि अब होब कि रानी॥ ३ ॥

अर्थ

विधाता ने कुरूप बनाकर मुझे परवश कर दिया! [दूसरे को क्या दोष] जो बोया सो काटती हूँ, दिया सो पाती हूँ। कोई भी राजा हो, हमारी क्या हानि है? दासी छोड़कर अब क्या मैं रानी होऊँगी।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “सरस्वती का मंथरा की बुद्धि फेरना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सरस्वती द्वारा मंथरा की बुद्धि फेरना और कैकेयी को वरदान माँगने के लिए उकसाने का वर्णन है।

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सरस्वती का मंथरा की बुद्धि फेरना