कहहिं झूठि फुरि बात बनाई

चौपाई २, दोहा १६ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

कहहिं झूठि फुरि बात बनाई। ते प्रिय तुम्हहि करुइ मैं माई॥ हमहुँ कहबि अब ठकुरसोहाती। नाहिं त मौन रहब दिनु राती॥ २ ॥

अर्थ

जो झूठी-सच्ची बातें बनाकर कहते हैं, हे माई! वे ही तुम्हें प्रिय हैं और मैं कड़वी लगती हूँ! अब मैं भी ठकुरसुहाती (मुँहदेखी) कहा करूँगी। नहीं तो दिन-रात चुप रहूँगी।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “सरस्वती का मंथरा की बुद्धि फेरना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सरस्वती द्वारा मंथरा की बुद्धि फेरना और कैकेयी को वरदान माँगने के लिए उकसाने का वर्णन है।

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सरस्वती का मंथरा की बुद्धि फेरना