कारन कवन भरतु बन जाहीं

चौपाई २, दोहा १८९ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

कारन कवन भरतु बन जाहीं। है कछु कपट भाउ मन माहीं॥ जौं पै जियँ न होति कुटिलाई। तौ कत लीन्ह संग कटकाई॥ २ ॥

अर्थ

क्या कारण है जो भरत वन को जा रहे हैं, मन में कुछ कपट-भाव अवश्य है। यदि मन में कुटिलता न होती, तो साथ में सेना क्यों ले चले हैं।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “निषाद की शंका और सावधानी” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १८९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत की सेना देख निषादराज गुह की शंका और सावधानी का वर्णन है।

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निषाद की शंका और सावधानी