सई तीर बसि चले बिहाने
सई तीर बसि चले बिहाने
चौपाई १, दोहा १८९ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
सई तीर बसि चले बिहाने। सृंगबेरपुर सब निअराने॥ समाचार सब सुने निषादा। हृदयँ बिचार करइ सबिषादा॥ १ ॥
अर्थ
रातभर सई नदी के तीर पर निवास करके सबेरे वहाँ से चल दिये और सब श्रृंगवेरपुर के समीप जा पहुँचे। निषादराज ने सब समाचार सुने, तो वह दुखी होकर हृदय में विचार करने लगा—।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “निषाद की शंका और सावधानी” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १८९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत की सेना देख निषादराज गुह की शंका और सावधानी का वर्णन है।
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निषाद की शंका और सावधानी