करबि पायँ परि बिनय बहोरी
करबि पायँ परि बिनय बहोरी
चौपाई ४, दोहा १५१ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
करबि पायँ परि बिनय बहोरी। तात करिअ जनि चिंता मोरी॥ बन मग मंगल कुसल हमारें। कृपा अनुग्रह पुन्य तुम्हारें॥ ४ ॥
अर्थ
फिर पाँव पकड़कर विनती करना कि हे तात! आप मेरी चिन्ता न कीजिये। आपकी कृपा, अनुग्रह और पुण्य से वन में और मार्ग में हमारा कुशल-मंगल होगा।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ-सुमंत्र संवाद और दशरथ का देहावसान” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १५१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुमंत्र-दशरथ संवाद और राम-वियोग में दशरथ का देहावसान का वर्णन है।
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दशरथ-सुमंत्र संवाद और दशरथ का देहावसान