बेलि बिटप सब सफल सफूला
बेलि बिटप सब सफल सफूला
चौपाई २, दोहा २७९ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
बेलि बिटप सब सफल सफूला। बोलत खग मृग अलि अनुकूला॥ तेहि अवसर बन अधिक उछाहू। त्रिबिध समीर सुखद सब काहू॥ २ ॥
अर्थ
बेलें और वृक्ष सभी फल और फूलों से युक्त हो गये। पक्षी, पशु और भौरे अनुकूल बोलने लगे। उस अवसर पर वन में बहुत उत्साह (आनन्द) था, सब किसी को सुख देनेवाली शीतल, मन्द, सुगन्ध हवा चल रही थी।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “जनकजी का चित्रकूट आगमन, सबका मिलन” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २७९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राजा जनक का चित्रकूट आगमन और कोल-किरात सहित सभी का प्रेमपूर्ण मिलन का वर्णन है।
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जनकजी का चित्रकूट आगमन, सबका मिलन