कलपबेलि जिमि बहुबिधि लाली
कलपबेलि जिमि बहुबिधि लाली
चौपाई २, दोहा ५९ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
कलपबेलि जिमि बहुबिधि लाली। सींचि सनेह सलिल प्रतिपाली॥ फूलत फलत भयउ बिधि बामा। जानि न जाइ काह परिनामा॥ २ ॥
अर्थ
इन्हें कल्पलता के समान मैंने बहुत तरह से बड़े लाड़-चाव के साथ स्नेह-रूपी जल से सींचकर पाला है। अब इस लता के फूलने-फलने के समय विधाता वाम हो गये। कुछ जाना नहीं जाता कि इसका क्या परिणाम होगा।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “राम-कौसल्या संवाद” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ५९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा माता कौसल्या को वनवास का समाचार और धर्म का उपदेश का वर्णन है।
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राम-कौसल्या संवाद