कैकेई सुअ कुटिलमति राम बिमुख गतलाज

दोहा १७८ · अयोध्याकाण्ड

दोहा पाठ

कैकेई सुअ कुटिलमति राम बिमुख गतलाज। तुम्ह चाहत सुखु मोहबस मोहि से अधम कें राज॥ १७८ ॥

अर्थ

कैकेयी के पुत्र, कुटिलमति, रामविमुख और निर्लज्ज मुझ-से अधम के राज्य से आप मोह के वश होकर ही सुख चाहते हैं।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “वसिष्ठ-भरत संवाद, चित्रकूट यात्रा की तैयारी” प्रकरण का दोहा १७८ है। इस प्रकरण में गुरु वसिष्ठ द्वारा भरत को धर्म-उपदेश और चित्रकूट यात्रा की तैयारी का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
वसिष्ठ-भरत संवाद, चित्रकूट यात्रा की तैयारी