जाउँ राम पहिं आयसु देहू

चौपाई ४, दोहा १७८ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

जाउँ राम पहिं आयसु देहू। एकहिं आँक मोर हित एहू॥ मोहि नृप करि भल आपन चहहू। सोउ सनेह जड़ता बस कहहू॥ ४ ॥

अर्थ

मुझे आज्ञा दीजिये, मैं श्रीरामजी के पास जाऊँ! एक ही निश्चय मेरा हित इसी में है। और मुझे राजा बनाकर आप अपना भला चाहते हैं, यह भी आप स्नेह की जड़ता के वश होकर ही कह रहे हैं।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “वसिष्ठ-भरत संवाद, चित्रकूट यात्रा की तैयारी” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १७८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में गुरु वसिष्ठ द्वारा भरत को धर्म-उपदेश और चित्रकूट यात्रा की तैयारी का वर्णन है।

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वसिष्ठ-भरत संवाद, चित्रकूट यात्रा की तैयारी