कैकइ सुअन जोगु जग जोई

चौपाई १, दोहा १८१ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

कैकइ सुअन जोगु जग जोई। चतुर बिरंचि दीन्ह मोहि सोई॥ दसरथ तनय राम लघु भाई। दीन्हि मोहि बिधि बादि बड़ाई॥ १ ॥

अर्थ

कैकेयी के लड़के के लिये संसार में जो कुछ योग्य था, चतुर विधाता ने मुझे वही दिया। पर “दशरथजी का पुत्र” और “राम का छोटा भाई” होने की बड़ाई मुझे विधाता ने व्यर्थ ही दी।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “वसिष्ठ-भरत संवाद, चित्रकूट यात्रा की तैयारी” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १८१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में गुरु वसिष्ठ द्वारा भरत को धर्म-उपदेश और चित्रकूट यात्रा की तैयारी का वर्णन है।

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वसिष्ठ-भरत संवाद, चित्रकूट यात्रा की तैयारी