तुम्ह सब कहहु कढ़ावन टीका

चौपाई २, दोहा १८१ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

तुम्ह सब कहहु कढ़ावन टीका। राय रजायसु सब कहँ नीका॥ उतरु देउँ केहि बिधि केहि केही। कहहु सुखेन जथा रुचि जेही॥ २ ॥

अर्थ

आप सब लोग भी मुझे टीका कढ़ाने के लिये कह रहे हैं! राजा की आज्ञा सभी के लिये अच्छी है। मैं किस-किस को किस-किस प्रकार से उत्तर दूँ? जिसकी जैसी रुचि हो, आप लोग सुखपूर्वक वही कहें।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “वसिष्ठ-भरत संवाद, चित्रकूट यात्रा की तैयारी” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १८१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में गुरु वसिष्ठ द्वारा भरत को धर्म-उपदेश और चित्रकूट यात्रा की तैयारी का वर्णन है।

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वसिष्ठ-भरत संवाद, चित्रकूट यात्रा की तैयारी