कै तापस तिय कानन जोगू
कै तापस तिय कानन जोगू
चौपाई २, दोहा ६० के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
कै तापस तिय कानन जोगू। जिन्ह तप हेतु तजा सब भोगू॥ सिय बन बसिहि तात केहि भाँती। चित्रलिखित कपि देखि डेराती॥ २ ॥
अर्थ
अथवा तपस्वियों की स्त्रियाँ वन में रहने योग्य हैं, जिन्होंने तपस्या के लिये सब भोग तज दिये हैं। हे पुत्र! जो तस्वीर के बन्दर को देखकर डर जाती हैं वे सीता वन में किस तरह रह सकेंगी?
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “राम-कौसल्या संवाद” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ६० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा माता कौसल्या को वनवास का समाचार और धर्म का उपदेश का वर्णन है।
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राम-कौसल्या संवाद