सुरसर सुभग बनज बन चारी

चौपाई ३, दोहा ६० के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

सुरसर सुभग बनज बन चारी। डाबर जोगु कि हंसकुमारी॥ अस बिचारि जस आयसु होई। मैं सिख देउँ जानकिहि सोई॥ ३ ॥

अर्थ

देवसरोवर के सुगंधित कमलवन में विचरण करनेवाली हंसकुमारी क्या डाबरों में रहने के योग्य है? ऐसा विचारकर जैसी तुम्हारी आज्ञा हो, मैं जानकी को वैसी ही शिक्षा दूँ।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “राम-कौसल्या संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ६० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा माता कौसल्या को वनवास का समाचार और धर्म का उपदेश का वर्णन है।

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राम-कौसल्या संवाद