बन हित कोल किरात किसोरी
बन हित कोल किरात किसोरी
चौपाई १, दोहा ६० के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
बन हित कोल किरात किसोरी। रचीं बिरंचि बिषय सुख भोरी॥ पाहनकृमि जिमि कठिन सुभाऊ। तिन्हहि कलेसु न कानन काऊ॥ १ ॥
अर्थ
वन के लिये तो ब्रह्माजी ने विषय-सुख को न जाननेवाली कोल और भीलों की लड़कियों को रचा है, जिनका पत्थर के कीड़े जैसा कठोर स्वभाव है। उन्हें वन में कभी क्लेश नहीं होता।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “राम-कौसल्या संवाद” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ६० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा माता कौसल्या को वनवास का समाचार और धर्म का उपदेश का वर्णन है।
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राम-कौसल्या संवाद