कहेउ लेहु सबु तिलक समाजू

चौपाई २, दोहा १८७ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

कहेउ लेहु सबु तिलक समाजू। बनहिं देब मुनि रामहि राजू॥ बेगि चलहु सुनि सचिव जोहारे। तुरत तुरग रथ नाग सँवारे॥ २ ॥

अर्थ

और कहा—तिलक का सब सामान ले चलो। वन में ही मुनि वसिष्ठजी श्रीरामचन्द्रजी को राज्य देंगे, जल्दी चलो। यह सुनकर मन्त्रियों ने वन्दना की और तुरंत घोड़े, रथ और हाथी सजवा दिये।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरत-शत्रुघ्न सहित अयोध्यावासियों का वनगमन” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १८७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत-शत्रुघ्न, माताओं, गुरुजन और अयोध्यावासियों के प्रेमपूर्ण वनगमन का वर्णन है।

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भरत-शत्रुघ्न सहित अयोध्यावासियों का वनगमन