चक्क चक्कि जिमि पुर नर नारी

चौपाई १, दोहा १८७ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

चक्क चक्कि जिमि पुर नर नारी। चहत प्रात उर आरत भारी॥ जागत सब निसि भयउ बिहाना। भरत बोलाए सचिव सुजाना॥ १ ॥

अर्थ

नगर के नर-नारी चकवे-चकवी की भाँति हृदय में अत्यन्त आर्त होकर प्रातःकाल का होना चाहते हैं। सारी रात जागते-जागते सबेरा हो गया। तब भरतजी ने चतुर मन्त्रियों को बुलवाया—।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरत-शत्रुघ्न सहित अयोध्यावासियों का वनगमन” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १८७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत-शत्रुघ्न, माताओं, गुरुजन और अयोध्यावासियों के प्रेमपूर्ण वनगमन का वर्णन है।

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भरत-शत्रुघ्न सहित अयोध्यावासियों का वनगमन