अरुंधती अरु अगिनि समाऊ
अरुंधती अरु अगिनि समाऊ
चौपाई ३, दोहा १८७ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
अरुंधती अरु अगिनि समाऊ। रथ चढ़ि चले प्रथम मुनिराऊ॥ बिप्र बृंद चढ़ि बाहन नाना। चले सकल तप तेज निधाना॥ ३ ॥
अर्थ
सबसे पहले मुनिराज वसिष्ठजी अरुन्धती और अग्नि समाऊ सहित रथ पर सवार होकर चले। फिर ब्राह्मणों के समूह, जो सब-के-सब तपस्या और तेज के भण्डार थे, अनेकों सवारियों पर चढ़कर चले।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “भरत-शत्रुघ्न सहित अयोध्यावासियों का वनगमन” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १८७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत-शत्रुघ्न, माताओं, गुरुजन और अयोध्यावासियों के प्रेमपूर्ण वनगमन का वर्णन है।
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भरत-शत्रुघ्न सहित अयोध्यावासियों का वनगमन