कहउँ जान बन तौ बड़ि हानी
कहउँ जान बन तौ बड़ि हानी
चौपाई ३, दोहा ५५ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
कहउँ जान बन तौ बड़ि हानी। संकट सोच बिबस भइ रानी॥ बहुरि समुझि तिय धरमु सयानी। रामु भरतु दोउ सुत सम जानी॥ ३ ॥
अर्थ
और यदि वन जाने को कहती हूँ तो बड़ी हानि होती है। इस प्रकार के धर्म-संकट में पड़कर रानी विशेष रूप से सोच के वश हो गयीं। फिर बुद्धिमती कौसल्याजी स्त्री-धर्म (पातिब्रत-धर्म) को समझकर और राम तथा भरत दोनों पुत्रों को समान जानकर--।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “राम-कौसल्या संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ५५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा माता कौसल्या को वनवास का समाचार और धर्म का उपदेश का वर्णन है।
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राम-कौसल्या संवाद