सरल सुभाउ राम महतारी

चौपाई ४, दोहा ५५ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

सरल सुभाउ राम महतारी। बोली बचन धीर धरि भारी॥ तात जाउँ बलि कीन्हेहु नीका। पितु आयसु सब धरमक टीका॥ ४ ॥

अर्थ

सरल स्वभाववाली श्रीरामचन्द्रजी की माता बड़ा धीरज धरकर वचन बोलीं--हे तात! मैं बलिहारी जाती हूँ, तुमने अच्छा किया। पिताजी की आज्ञा का पालन करना ही सब धर्मों का शिरोमणि धर्म है।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “राम-कौसल्या संवाद” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ५५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा माता कौसल्या को वनवास का समाचार और धर्म का उपदेश का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
राम-कौसल्या संवाद