कहत राम गुन गन अनुरागे
कहत राम गुन गन अनुरागे
चौपाई ४, दोहा २७४ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
कहत राम गुन गन अनुरागे। सब निज भाग सराहन लागे॥ हम सम पुन्य पुंज जग थोरे। जिन्हहि रामु जानत करि मोरे॥ ४ ॥
अर्थ
श्रीरामजी के गुणसमूहों को कहते-कहते सब लोग प्रेम में भर गये और अपने भाग्य की सराहना करने लगे कि जगत में हमारे समान पुण्य की बड़ी पूँजी वाले थोड़े ही हैं; जिन्हें श्रीरामजी अपना करके जानते हैं।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “जनकजी का चित्रकूट आगमन, सबका मिलन” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २७४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राजा जनक का चित्रकूट आगमन और कोल-किरात सहित सभी का प्रेमपूर्ण मिलन का वर्णन है।
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जनकजी का चित्रकूट आगमन, सबका मिलन