कहहु तात जननी बलिहारी

चौपाई ४, दोहा ५२ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

कहहु तात जननी बलिहारी। कबहिं लगन मुद मंगलकारी॥ सुकृत सील सुख सीवँ सुहाई। जनम लाभ कइ अवधि अघाई॥ ४ ॥

अर्थ

हे तात! माता बलिहारी जाती है, कहो, वह आनन्द-मंगलकारी लग्न कब है, जो मेरे पुण्य, शील और सुख की सुन्दर सीमा है और जन्म लेने के लाभ की पूर्णतम अवधि है।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “राम-कौसल्या संवाद” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ५२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा माता कौसल्या को वनवास का समाचार और धर्म का उपदेश का वर्णन है।

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राम-कौसल्या संवाद