कहहिं परसपर पुर नर नारी

चौपाई २, दोहा ७६ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

कहहिं परसपर पुर नर नारी। भलि बनाइ बिधि बात बिगारी॥ तन कृस मन दुखु बदन मलीने। बिकल मनहुँ माखी मधु छीने॥ २ ॥

अर्थ

नगर के स्त्री-पुरुष आपस में कह रहे हैं कि विधाता ने खूब बनाकर बात बिगाड़ी! उनके शरीर दुबले, मन दुःखी और मुख मलीन हो रहे हैं। वे ऐसे व्याकुल हैं जैसे शहद छीन लिये जाने पर मक्खियाँ व्याकुल हों।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ से विदाई, सीता का अटल निश्चय” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ७६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राम, सीता और लक्ष्मण द्वारा दशरथ से वन-गमन की विदाई और सीता के अटल निश्चय का वर्णन है।

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दशरथ से विदाई, सीता का अटल निश्चय