जो मुनीस जेहि आयसु दीन्हा
जो मुनीस जेहि आयसु दीन्हा
चौपाई १, दोहा ७ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
जो मुनीस जेहि आयसु दीन्हा। सो तेहिं काजु प्रथम जनु कीन्हा॥ बिप्र साधु सुर पूजत राजा। करत राम हित मंगल काजा॥ १ ॥
अर्थ
मुनीश्वर ने जिसको जिस काम के लिये आज्ञा दी, उसने वह काम [इतनी शीघ्रता से कर डाला कि] मानो पहले से ही कर रखा था। राजा ब्राह्मण, साधु और देवताओं को पूज रहे हैं और श्रीरामचन्द्रजी के लिये सब मङ्गल कार्य कर रहे हैं।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की प्रार्थना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामराज्याभिषेक की तैयारी और देवताओं द्वारा सरस्वतीजी से वनगमन हेतु प्रार्थना का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की प्रार्थना