ध्वज पताक तोरन कलस सजहु तुरग
ध्वज पताक तोरन कलस सजहु तुरग
दोहा ६ · अयोध्याकाण्ड
दोहा पाठ
ध्वज पताक तोरन कलस सजहु तुरग रथ नाग। सिर धरि मुनिबर बचन सबु निज निज काजहिं लाग॥ ६ ॥
अर्थ
ध्वजा, पताका, तोरण, कलश, घोड़े, रथ और हाथी सबको सजाओ। मुनिश्रेष्ठ वसिष्ठजी के वचनों को शिरोधार्य करके सब लोग अपने-अपने काम में लग गये।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की प्रार्थना” प्रकरण का दोहा ६ है। इस प्रकरण में रामराज्याभिषेक की तैयारी और देवताओं द्वारा सरस्वतीजी से वनगमन हेतु प्रार्थना का वर्णन है।
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राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की प्रार्थना