सुनत राम अभिषेक सुहावा
सुनत राम अभिषेक सुहावा
चौपाई २, दोहा ७ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
सुनत राम अभिषेक सुहावा। बाज गहागह अवध बधावा॥ राम सीय तन सगुन जनाए। फरकहिं मंगल अंग सुहाए॥ २ ॥
अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी के राज्याभिषेक की सुहावनी खबर सुनते ही अवध भर में बड़ी धूम से बधावे बजने लगे। श्रीरामचन्द्रजी और सीताजी के शरीर में भी शुभ शकुन सूचित हुए। उनके सुन्दर मङ्गल अंग फड़कने लगे।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की प्रार्थना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामराज्याभिषेक की तैयारी और देवताओं द्वारा सरस्वतीजी से वनगमन हेतु प्रार्थना का वर्णन है।
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राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की प्रार्थना